छोटा विक्रम बाल बेताल - माइथोलॉजी फंतासी लेखक श्रीकांत विश्वकर्मा को मिला लन्दन से बुक पब्लिश करवाने का ऑफर

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छोटा विक्रम बाल बेताल -  माइथोलॉजी फंतासी लेखक श्रीकांत विश्वकर्मा को मिला लन्दन से बुक पब्लिश करवाने का ऑफर



छोटा विक्रम और बाल बेताल एक बेहतरीन उपन्यास है जिसके लेखक माइथोलॉजी और फंतासी के लेखक श्रीकांत विश्वकर्मा जी है. श्रीकांत विश्वकर्मा मूलत: झारखण्ड बोकारो के रहने वाले हैं जो मुंबई में रहकर लेखन कार्य करते हैं. श्रीकांत विश्वकर्मा ने अब तक चन्द्रकान्ता, परशुराम, गौ माता कामधेनु, तिरुपति बालाजी, माता सरस्वती, राहू केतु. काकभुशंडी रामायण, काल भैरव, जैसे अनेको टीवी शोज लिखे हैं. श्रीकांत की सबसे बड़ी खासियत उनकी अपनी फंतासी लेखन की है  जिसके लिए वो जाने जाते हैं.  

श्रीकांत जी के अनुसार उन्हें बचपन से कहानियाँ लिखना पसंद था. उन्ही काहनियों ने उन्हें मुम्बई का रास्ता दिखाया और वे एक लेखक बन गए. लेकिन शुरुवाती दिनों का समय उनके लिए बहुत कठिन रहा. लेखक श्रीकांत विश्वकर्मा के अनुसार वे मुंबई के पनवेल, बेलापुर और कल्याण में रहे फिर अँधेरी सात बँगला आकर रहने लगे. फिर पैसे ना होने पर दोस्तों के साथ मढ आयलैंड में पतरे के घर पर रहने चले गए मगर वहां भी काम करते हुए श्रीकांत श्रीकांत विश्वकर्मा ने अपना जूनून नहीं छोड़ा और वे लिखते रहे. 


शुरुवात में उन्हें कई बार असफलता मिली. उन्होंने सहायक निर्देशक के रूप में भी काम किया लेकिन उनका मन हमेशा कहानियाँ लिखने में लगा रहता था. फिर अचानक श्रीकांत विश्वकर्मा टीवी और फिल्म के मशहूर निर्माता निर्देश सुनील अग्निहोत्री के पास पहुँच गए. सुनील अग्निहोत्री के पास श्रीकांत विश्वकर्मा को फंतासी टीवी शो कहानी चन्द्रकान्ता की लिखने का मौका मिला जो उस समय सहारा में आता था. 


उसके बाद श्रीकांत ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और वे एक  के बाद एक टीवी शो लिखते चले गए.  वैसे श्रीकांत विश्वकर्मा ने कॉमेडी मूवी  बलविंदर सिंह फेमस हो गया , हैप्पी होम्स, कॉमेडी शो, क्राइम अलर्ट सावधान इंडिया, भंवर जैसे कुछ एपिसोड्स भी लिखे लेकिन उनकी रुचि अचानक माइथोलॉजी और फंतासी की और जागी और फिर उन्हें परशुराम शो मिल गया. 

टीवी के लिए लिखते लिखते श्रीकांत विश्स्वकर्मा ने नॉवेल भी लिखना शुरू किया. छोटा विक्रम और बाल बेताल श्रीकांत विश्वकर्मा की पहली रचना है जिसे उन्होंने अमेज़न के किनडल पर सालों पहले स्वयं ही प्रकाशित किया था लेकिन अचानक कुछ दिनों पहले लन्दन की बुक एडिटर की नज़र श्रीकांत विश्वकर्मा की कहानी छोटा विक्रम और बाल बेताल पर पड़ी और उन्होंने सीधा मेल करके कहा कि वो छोटा विक्रम और बाल बेताल को उनके यहाँ लन्दन से प्रकाशित करना चाहते हैं. 


ये श्रीकांत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी उन्होंने तुरंत ही इस अवसर का लाभ उठाया. बहुत ही जल्द श्रीकांत विश्वकर्मा की किताब जो खासकर बच्चों के लिए लिखी गयी है आप सब के सामने होगी..

 

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